स्वतंत्र भारत के झांकी : भाग – 18

अध्याय – 3 “भारत के पडोसी देशन से युद्ध  – 4”

1965 : भारत पाकिस्तान युद्ध-‘अ’

एह सीरीज के 20वां भाग अगिला अंक में भारत पाकिस्तान युद्ध के बारे में बात होई| तक हमनी के पहिला अध्याय ‘राष्ट्र एकीकरण के चुनौती’ के बारे में देखनी जा| एह अध्याय में हमनी के एह बात से अवगत भईनी जा कि कईसे लार्ड माउंटबेटेंन, सरदार पटेल, जवाहर लाल नेहरु अउरी वी.पी. मेनन के टीम पाहिले त्रावनकोर ओकरा बाद जोधपुर, जैसलमेर, जूनागढ़, हैदराबाद अउरी कश्मीर के एकीकरण करे में सफल भईले जा| दूसरा अध्याय ‘देश के भीतर मूलभूत एकीकरण’ में हमनी के देखनीजा कि कईसे सबसे पहले प्रशासनिक एकीकरण भईल, ओकरा बाद आर्थिक एकीकरण, सामाजिक एकीकरण भईल| एकरा अलावां राज्यन के भाषाई एकीकरण अउरी क्षेत्रीयता के खिलाफ एकीकरण प भी चर्चा कईनी जा|

ओकरा बाद तीसरा अध्याय शुरू भईल जवन भारत के पडोसी देशन के साथे जतना युद्ध भईल बा ओकरा बारें में विस्तार से चर्चा हो रहल बा| एह अध्याय के पहिला अंक में भारत पकिस्तान के पहिला युद्ध 1947 के बात हो चुकल बा| ओकरा बाद दूसरा आ तीसरा अध्याय में भारत चाइना युद्ध 1962 के बारें में बतकही भईल| एह अंक में भारत पाकिस्तान युद्ध 1965 के बारे में बात होई| इ युद्ध भारत पाकिस्तान के बीचे दूसरा युद्ध ह|

27 मई 1964 के पंडित जवाहर लाल नेहरु के निधन भईल| उनकर निधन भईला के बाद सबसे बड संकट देश के सामने इहे रहे कि जवाहरलाल नेहरु के बाद के प्रधानमंत्री के होई? ओह घरी कामराज कांग्रेस के अध्यक्ष रहन| उनका लगे भी चुनौती रहे कि केकरा के बनावल जाव| मोरारजी देसाई के दावेदारी साफ़ रहे लेकिन दूसरा दावेदारी खातिर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गाँधी अउरी जयप्रकाश नारायण के भी बात चलत रहे| शास्त्री जी खुद इंदिरा गाँधी अउरी शास्त्री जी के विकल्प के तौर पर देखत रहन|

लेकिन कामराज पूरा देश के नेता लोगन से मिलके एगो आम सहमती बनईले जवना में लाल बहादुर शास्त्री जी के प्रधानमंत्री के रूप में पेश कईल गईल| हालाँकि मोरारजी देसाई के कहनाम रहे प्रधानमंत्री पार्टी तय मत करे बल्कि संसदीय दल के लोग करे| कांग्रेस के छवि के ध्यान में रख के लाल बहादुर शास्त्री के न्युक्त कईल गईल| समय बदल चुकल रहे पाहिले लेखा बात ना रहे|

जवाहर लाल नेहरु के लगे कवनो विरोध ना रहे, खुल के फैसला लेत रहन| कांग्रेस पार्टी उनका निचे आवत रहे लेकिन लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनला के बाद पार्टी के प्रधानमंत्री से ऊपर राख देवल गईल| कामराज के भी लक्ष्य इहे रहे| सरल स्वाभाव के व्यक्तित्व वाला व्यक्ति के, ज्यादातर नेता जवाहर लाल नेहरु के मुकाबला बहुत लचर मानत रहे| इहाँ तक कि इंदिरा गाँधी चिठ्ठी लिख के उनका के कमजोर होखे के एहसास दिवईले बाड़ी|

बात त्रिमूर्ति भवन के लेके रहे जवना में इंदिरा गाँधी आ कुछ लोगन के कहनाम रहे कि ओकरा के नेहरु मेमोरियल में तब्दील कर देवल जाव| इंदिरा गाँधी चिठ्ठी में इहे कहली कि नेहरु जी के समय देश के कोना कोना से ढेर लोग आवत रहे, एह से उनका जरूरत रहे लेकिन शायद शास्त्री जी के अब एकर जरूरत ना परी| कहे के मतलब इ कि जवना हिसाब ने जवाहर लाल नेहरु फैसला लेत रहन अब ओइसन रह ना गईल| लाल बहादुर शास्त्री एह बात तक के निर्णय ना लेत पावत रहन कि उनका प्रधानमंत्री आवास में रहे के बा कि ना|

चीन से लड़ाई के महज तीन साल बाद भारत युद्ध दने घूम चुकल रहे| अभी पुरान लड़ाई के हार के जख्म भरल भी ना रहे कि पाकिस्तान के तरह से चुनौती मिले शुरू हो गईल रहे| पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान एह सब से कमजोरी मान के हमला करे के नियत बना लेले रहन| उ एह नतीजा प एह पहुचले काहे कि उनका लागल कि जवाहर लाल नेहरु के निधन के बाद भारत के स्तिथि काफी जर्जर बा| पहिला चीज कि 1962 में भईल हार से काफी छती पहुचल रहे आ भारत ओह सब से काफी आहत रहे|

दूसरा कारण इ रहे कि जवाहरलाल नेहरु के निधन भईला के बाद लाल बहादुर शास्त्री के एगो कमजोर प्रधानमत्री के तौर प एहसास करवावल जात रहे| तीसरा, ऊपर से विपक्ष के विरोध भी सीमा प रहे| नेहरु जी लेखा उनका लगे स्वतंत्र होखे निर्णय लेवे के शक्ति ना रहे| चउथा, भारत के आर्थिक स्तिथि भी कमजोर हो चुकल रहे सबसे बड संकट खाद्दान के लेके रहे| आनाज संकट से निपटे खातिर लाल बहादुर शास्त्री खुद प्रधानमंत्री आवास के लॉन में दू बैलन के साथे खेती शुरू कईले आ देश के किसानन के एगो बढ़िया सन्देश दिहले जवना से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो सको|

इ सब अभी चलत ही रहे तले पाकिस्तान अप्रैल 1965 में कच्छ के रन के इलाका में आपन गश्त लगावे शुरू कर दिहलस| एकर सीमा के लेके दुनों देशन के बीच विवाद बिल्कुल ना रहे| पाकिस्तान भारत के एगो इलाका कंजरकोट के कब्ज़ा में लेले रहे| इ बात सही बा कि भारत युद्ध के आगाह बिल्कुल नइखे कईले| युद्ध के शुरुआत पाकिस्तान के दने से ही भईल| एह बात के पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार महमूद अली दुर्रानी भी स्वीकार करेले कि पाकिस्ताने, भारत के युद्ध खातिर उकसईले रहे| मार्च के महीना से ही पाकिस्तान सीमा प छोट-मोट घुसपैठ अउरी गोलीबारी शुरू हो चुकल रहे|

तब ब्रिटेन के मध्यस्थता प मामला सुलझावल गईल रहे| एह समझौता में भारत के लगभग ७५ स्क्वायर मील जमीन पाकिस्तान के देवे के परल रहे जवना के तित आलोचना सांसद में, लाल बहादुर शास्त्री के झेले के परल रहे| संसद में आलोचना करे वाला में पंडित नेहरु के बहिन विजयालक्ष्मी पंडित भी रही| रन ऑफ़ कच्छ प भईल समझौता एक प्रकार के युद्ध टाले के कोशिश रहे| चुकी भारत के स्तिथि सही ना रहे, एह से आपन गोड पीछे खिचे के कोशिश करत रहे|

लेकिन लालबहादुर शास्त्री के जवना हिसाब से पाहिले एगो कमजोर प्रधानमंत्री के रूप में घेरल जात रहे फिर से ओइसने सवाल पैदा शुरू होखे लागल| समझौता त पाकिस्तान के पक्ष में हो गईल, लेकिन पाकिस्तान के इरादा कुछ अउरी रहे| पाकिस्तान कश्मीर के जनता के आपन घुसपैठियन के मदद से भड़का के भारत के ख़िलाफ़ विद्रोह करवावल चाहत रहे| पाकिस्तान एह मिशन के नाम रखले रहे ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’| 5 अगस्त के पाकिस्तान, भारत के ख़िलाफ़ आधिकारिक तौर प युद्ध छेड़ देले रहे|

एही महिना में लगभग तीस हजार पाकिस्तानी सैनिक स्थानीय लोगन के बेशभूषा में भारत के कश्मीर इलाका में घुसल| ओहिजा के रहे वाला लोग एह सब बात के जानकारी भारतीय सेना के जब देहलस तब भारतीय सेना आपन कार्यवाई शुरू कईलस| हालाँकि पाकिस्तान के उम्मीद रहे कि भारत, कश्मीर में घुसपैठियन से मुकाबला करे में उलझइले रही आ उ लोग कश्मीरि लोगन के भ्रमित करे में सफल हो जाई| एह दौरान कश्मीरी जनतों भारतीय सेना के ख़िलाफे विद्रोह करी अउरी कश्मीर के भारतीय हिस्सा, पाकिस्तान के हाथ में आ जाई|

भारत चीन से युद्ध हरला के बाद एह हालत में ना रहे कि फिर से एगो युद्ध झेल सके| एही चीज के फायदा पाकिस्तान उठईलस| भारत सरकार के पाकिस्तानी सेना के कश्मीर में भी घुसे के खबर मिलल| पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल आयूब खान अउरी विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के चोख नजर कश्मीर प रहे| 1 सितम्बर 1965 के ऑपरेशन ‘ग्रैंडस्लैम’ के तहत पाकिस्तानी फ़ौज कश्मीर के छम्म में भारतीय सेना प तोप वेग्रह से बरियार हमला कईलस| एक हफ्ता के भीतरे पाकिस्तान टिथवाल, उड़ी अउरी पुंछ के कुछ महत्त्वपूर्ण इलाकन प कब्जा कर लेलस|

एह ऑपरेशन में मुख्य उद्देश्य इ रहे कि भारत के अउरी जम्मूकश्मीर के बीच के कनेक्शन के तुरल जा सको ताकी व्यवस्था भंग कईल जा सके| पाकिस्तान के भारी संख्या मे सैनिक अउरी बेहतर किस्म के टैंकन के लाभ मिलत रहे| शुरूवात मे भारत के भारी क्षती उठावे के परल| भारत के सेना छम्म में पाकिस्तान के दबाव के रोके में नाकाम साबित होत रहे| अब बड फैसला के जरूरत रहे, जरूरत रहे हवाई हमला के|

सितम्बर 1965 के थलसेना अध्यक्ष जनरल जे. एल. चौधरी अउरी वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल अर्जुन सिंह, रक्षामंत्री वाई.वी.चौहान, के छम्म के स्तिथि से आगाह कईल गईल| बातचीत भईला के बाद उहाँ के एयरफोर्स के उपयोग करे खातिर इजाजत दे दिहनी| हालाँकि बिना कैबिनेट से सलाह कईले फैसला देवल आसान काम ना होला| लेकिन उहाँ के इजाजत दे दिहनी| जब भारतीय वायु सेना, हवाई हमला के उपयोग कईलस तब एकरा जवाब मे पाकिस्तान, पंजाब अउरी श्रीनगर के हवाई ठिकानन प हमला कर देहलस|

युद्ध के एह चरण मे पाकिस्तान अत्यधिक बेहतर स्थिती मे रहे अउरी अप्रत्याशित हमला से भारतीय खेमा मे घबराहट फैले लागल रहे| पाकिस्तान के ऑपरेशन ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम एगो गहिराह काम इ कर गईल कि जम्मू-कश्मीर में स्तिथ सामरिक द्रुष्टी से महत्वपूर्ण शहर अखनूर प हमला कर देलस| अखनूर के पाकिस्तानी सेना के हाथ मे जाए से भारत खातिर, कश्मीर घाटी मे हार के खतरा पैदा हो सकत रहे| लेकिन ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम विफल भईल|

ग्रैंड स्लैम के विफल होखला के पीछे दू गो मुख्य कारण रहे| पहिला अउरी सबसे प्रमुख वजह इहे रहे कि पाकिस्तान के सैनिक कमान जीत के मुहँ प आके आपन सैनिक कमांडर के बदल देले रहे| एह से भईल का कि पाकिस्तानी सेना के आगे बढने मे एक दिन के देरी हो गईल अउरी ओह २४ घंटा मे भारत के अखनूर की रक्षा खातिर अतिरिक्त सैनिक अउरी सामान लावे ले मौका मिल गईल| खुद भारर्तीय सेना के स्थानीय कमांडर एह प भकुआ गईल रहले कि पाकिस्तान अतना आसान जीत काहे छोड़ केभागत रहे|

एक दिन के देरी के बावजूद भारत के पश्चिमी कमान के सेना प्रमुख एह बात से बढ़िया से वाकिफ रहन कि पाकिस्तान बहुत बेहतर स्थिती में रहे अउरी ओकरा के रोकने खातिर उहाँ के इ प्रस्ताव तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल चौधरी के देले कि पंजाब सीमा मे एक नाया मोर्चा खोल के लाहौर प हमला कर देवल जाव| जनरल चौधरी एह बात से सहमत ना रहन| लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शाष्त्री ने उनकर बात अनसुनी करके एह हमला के आदेश दे दिहले| इ फैसला उहे लाल बहादुर शास्त्री के रहे जेकरा प्रतिभा हमेशा सवाल उठावल जात रहे|

लाल बहादुर शास्त्री लड़ाई बढ़ावे के फैसला लेलन| दोसरा शब्द में कही त अब डिफेंड के मूड से अटैक के मूड में आ गईले| राजस्थान अउरी पंजाब के सीमा पाकिस्तान से जुडल बा| दुनो फ्रंट प अटैक करे के इजाजत दे देलन अउरी लाहौर प हमला करे के लक्ष्य के शामिल करवा देले| यानी कि कश्मीर बचावे के खातिर भारतीय सेना के अन्तरराष्ट्रीय नियंत्रण रेखा पार करे के छुट मिल चुकल रहे| एकरा बाद के कहानी अगिला अंक में|

 

See also  स्वतंत्र भारत के झांकी : भाग – 10
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