अधेड़ आजादी प स्वतंत्रता दिवस के पुकार (भोजपुरी)

सबसे पहिले 69वां स्वतंत्रता दिवस के वर्ष गांठ प रउरा सभे के आ दुनियां भर के समस्त देशवासी के हार्दिक अभिनन्दन करत बानी | हम सेना बल, पुलिस जवान, किसान, खिलाडी, सरकार, मजदूर भाई लोग के विशेष आभार प्रकट करत उंहा सभे के बधाई देत बानी | हर साल एह पावन पर्व प हमनी के ओह लोग के इयाद करीनाजा जे हमनी के ओह लायक बनईलस कि स्वतंत्र होके साँस ले सकिजा, जेकर पूरा जवानी माँ भारती खातिर कुर्बान हो गईल, ओह लोग के इयाद करीनाजा जे मोह, माया, प्रेम सब कुछ त्याग करके पूरा जीवन समर्पण कर देले रहे |

कहल आ लिखल काफी आसन बा लेकिन जमीनी स्तर प केतना दर्दनाक कहानी हो सकेला ओकर कल्पना चाह के भी ना कर सकीना जा | खैर हजारो हजार कहानी बाडिसन आजादी के सम्बंधित जवन तमाम तरह के सीख भी देला आ एगो प्रेरणा के रूप में भी सामने आवेला | आजादी के लगभग ज्यादातर हिस्सा पूरा करके हमनी के पूरा करके चल गईनी जा, बाकी के चीज हमनी के करे खातिर छोड़ गईनी जा जवना खातिर 69साल से प्रयासरत बानी जा | ओह अधेड़ आजादी के पूरा करे खातिर आज भी हमनी के पूर्वज पुकार रहल बा लोग |

अगर हमनी के इतिहास उठा के देखम जा त पाइम जा कि हमनी के आजादी के मूल रूप से दू गो धारा रहे, दुनो धारा आजादी खातिर समय के अनुसार जरूरी भी रहल रहे | पहिला धारा रहे अहिंसक आ दूसरा रहे सशस्त्र क्रांति वाला, हालाँकि दुनो धारा माँ भारती के गुलामी के जंजीर से मुक्त करवावे में अहम् योगदान देले बा | दुनो धारा के लेके आज के समय में भी  अलग अलग लोग के विभिन्न विचार रहेला आ पहिला भी रहे |

एकरा के अइसे आसानी से समझल जा सकेला, आज भी अगर रुआ संग्रहालय से रिपोर्ट निकाल के पढम त एगो बात रुआ पढ़े के मिली, चुकी जवना आदमी के फांसी जवना दिन सुनावल जाला ओह दिन ओकर मेडिकल चेकअप होला आ जवना दिन देल जाला ओह दिन चेकअप होला, ओही क्रम में भगत सिंह के जवना दिन फांसी देल गईल रहे ओह दिन उनकर वजन बढ़ गईल रहल रहे एह ख़ुशी में कि माँ भारती खातिर कुर्बान होखे जात बानी, जबकि सामान्यतः अईसन होला ना | उहाँ के भूमिका के भी हल्का में ना लेल जा सकेला | काफी बुद्धिजीवी के समूह आज भी विरोध करेला ना त आज ले शहीद के दर्जा सैवाधानिक रूप से दिया गईल रहित |

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दूसरा तरफ अगर नरमदल के बात कईल जाव तब महात्मा गाँधी के बात आवेला, देश के दुर्भाग्य कही कि आज भी लोग अंट-संट अश्लील किताब पढके विरोध करेला यहाँ तक कि आपन समाजसेवी कार्यालय में फोटो लगावे में भी हिचकिचा ला | घर के मुर्गी दाल बरोबर वाला बात हो जाला अगर उनकर अहमियत जाने के होखे तनी देश के बहरी के रिपोर्ट देखे के काम बा, हम कुछ दिन पाहिले मलाला के भाषण सुनत रही जवना दिन शांति में नोबेल पुरस्कार मिलल रहे, अगर भारत के तरफ से कवनो लीडर के नाम लेले रहली त उ महात्मा गाँधी ही रहले |

अफ्रीका आ श्रीलंका के दोस्त लोग हमार क्लासमेट बा, उ लोग जब भी बात करेला भारतीय नेता लोग के त ओह में महात्मा गाँधी के बात के चर्चा जरूर करेला लोग | उनकर विचार आज भी जिन्दा बा जवन सफलता के प्रमाण भी बा | शांति, अहिंसा से जेतना उहाँ के जीतल बानी आज भी ओह सब चीज के जीतल मुश्किल बा | जेतना भी आरोप लगावल गईल बा ओकर इमानदारी के विवेचना कईल जाई ओकर ओरिजनल डाक्यूमेंट्स के साथे, तबे सच्चाई से अगवत होई आदमी |

हम एह से कहनी ह काहे कि होला का कि जईसे, हमरा के कह दी लिखे के कवनो पार्टी के बारे में ओकर दू गो लेख लिखम एगो पक्ष आ दूसरा विपक्ष में दुनो अलग अलग आदमी के दे दी पढ़े के जे पहिला बार पढो ओह लेख के पक्ष वाला के लागी कि ना इ ठीक कहत बाडे पार्टी बहूत सुंदर काम कर रहल बा आ विपक्ष वाला कही पढ़ के कि साचो निकम्मा हो गईल बिया पार्टी | इ काम आजो होला राजनितिक परिपेक्ष में ओकरा के इंग्लिश में ‘लॉबीइंस्ट’ कहाला |

एहीसे कवनो लेख सम्पादकीय पढला के बाद एकबे अपना दिमाग के मिलावे के जरूर चाही | चुकी नकारात्मक चीज बड़ा जल्दी हावी होला आदमिन के दिमाग प एह से जवन कुछ अपना विद्यार्थी जीवन में सही पढले रहेला उ सब भुला के एगो पन्ना प कईल पक्षपात विश्लेषण प विश्वास करे शुरू कर देला | एकर माने इहो ना भईल कि सारा लेख आ विश्लेषण ओइसने होला काफी कुछ सच्चाई के भी बयाँ करत रहेला लेकिन ओह चीज से लोग अछूता रह जाला |

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आजादी के शेष बाचल चीज के मतभेद, मनभेद, वाद विवाद के साथे धीरे धीरे पूरा कर रहल बा लोग | पूरा आजादी कारनॉट के मशीन वाला प्रयोग हो रहल बा, एह असमंजस्य में कि कबो एकर 100% एफिशिएंसी(पूर्ण आजादी) होई कि ना ? कोशिश हो रहल बा संसदीय प्रयोगशाला में तमाम तरह के नीतिगत पहलु के संसोधन आ विचार करके आ पाहिले के अपेक्षाकृत काफी तरक्की पर भी बानी जा एकर विश्वास करीं सभे | उ सब बात के चुनावी जुमला ही मानम कि 69 साल में कुछ नइखे भईल बहूत कुछ भईल बा आजो हो रहल बा, विश्वास ना होखे तब रिपोर्ट उठा के पढ़ लेब |

ग्रीस जवना दौर से गुजर रहल बा ओह दौर से भारत भी गुजरल बा, झेलले बा एही माटी के लोग आ सुधार करके व्यवस्था ठीक कईले बा | उहो दौर भारत के रहल बा जवना घरी खुद खाए के ना रहे तबो बांग्लादेश के बटईलो प पेट भरे के कोशिश कईले एह से बड मानवता के उदहारण का होई ? अइसन बहूत बहूत समय आ चुनौती आइल बा जेकरा के हमनी के सरकार डट के मुकाबला कईले बिया चाहे हिम्मत के साथे परमाणु परिक्षण के बात होखे या पाकिस्तान अउरी चीन के लड़ाई के |

ओही में कुछ चीज रह गईल बा | अधुरा आजादी के सबसे बड चुनौती बा भारत में कृषि के चुनौती, शिक्षा में बढ़िया व्यवस्था, पिए के शुद्ध पानी के ब्यवस्था, बेरोजगार, धार्मिक मनभेद, विषम राजनीती, बढ़त अन्धविश्वास आदि | जहिया भारत के कोई इंसान भूखा ना सूती, दुनो वक्त पेट में दाना के साथ जिही, जहिया किसान के चेहरा प मुस्कान लउकी, जहिया वीर जवानन के हक़ मिले शुरू हो जाई, जहिया लईकन के समानता के साथ पढ़े के अधिकार मिल जाई, जहिया करे खातिर काम मिल जाई लोगन के, जहिया लईकन के बालमजदूरी से मुक्ति मिल जाई, जहिया धार्मिक असमानता ख़त्म हो जाई ओह दिन निश्चित रूप से भारत के पूर्ण स्वतंत्रता मिल जाई जवना खातिर हमनी के पूर्वज सपना देखले रहले |

हमरा विश्वास बा धीरे धीरे बहूत हद तक सफल भी होइम जा | एह सब जे जड़ बा भ्रष्टाचार, लोगन में आर्थिक असंतोष, मानवीय अवैव्हारिक पहलु, राजनितिक द्वेष, राजनितिक स्वार्थपना, कम समय में बहूत कुछ पावे के लालसा इ सब चीज से आदमी ऊपर उठ नइखे पावत | भोजपुरी भाषा भी हमनी के पूर्वज के देखल सपना ही रहल रहे जेकरा खातिर ढेर भोजपुरिया जवान आजो तत्पर बाड़े अइसने सपना के ही हम अधेड़ आजादी कहले बानी जेकर पूरा दारोमदार हमनी के पीढ़ी प बा |

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विशवास करीं धीरे धीरे सब सही हो जाई बस अपना तरफ से जवन योगदान होखे अपना समाज खातिर, संस्कृति खातिर, देश खातिर ओकरा के करीं | हम एह बात से सहमत बानी कि देश में 100 गो समस्या बा त हजार तरह के हल निकाले के दमखम भी एही माटी के लोगन में बा, बस जरूरत बा राजनितिक जहर से युवा पीढ़ी आ विद्यार्थी के बहरी निकालके अच्छा मार्गदर्शन देवे के | विकसित देश के समस्या के हल में भी हमनिओं के देश के लईकन के योगदान बा |

रघुराम राजन जी उदहारण बानी उहाँ अंतराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विवेचना आ निगरानी के रूप में काम करे वाला संस्था IMF(अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष) में उच्च पद प  कार्यरत रहल बानी, हमरा इयाद बा कि मनमोहन सिंह जी के एक बे कहला प आइले आ आके आर्थिक समस्या के हल निकलले भी रहले तत्कालीन वित्त मंत्री के साथे मिल के, ओह घरी डॉलर 73 के आस पास पहुच गईल रहे | गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जईसन बहूत सारा संस्था के प्रमुख के कुर्सी प बईठे के क्षमता भी एही देश के युवा में बा | उ सब लोग भारत के प्रत्यक्ष रूप से सेवा नइखे दे पावत ओह में हमनी के कही ना कही कमी बा जवना के हल कईल बहूत ज्यादा जरूरी बा | एह से हम इ पावन पर्व प उम्मीद करब कि लोग आपन नकारात्मकता के त्यागी खासकर हमनी के युवा पीढ़ी आ भारत के एगो सुखी देश बनावे में मदद करीं |

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