जलवायु परिवर्तन चिंता के गंभीर विषय (भोजपुरी)

जलवायु परिवर्तन भारत ही ना बल्कि पूरा विश्व खातिर एगो बड़ा ही गंभीर मुद्दा रहल बा| पूरा विश्व एकरा के लेके चिंतित बा| सबसे पाहिले इ कि जलवायु परिवर्तन ह का? जलवायु परिवर्तन हरित गृह प्रभाव (Green house effect) के वजह से होखे वाला तपन ह, जवना में पृथ्वी से टकराकर लौटे वाला सूर्य के किरण के वातावरण में उपस्थित कुछ गैस अवशोषित कर लेला| जवना के परिणामस्वरुप पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होला| उ गैस जवन हरित गृह प्रभाव खातिर उत्तरदायी बा ओकरा के हरितगृह गैस के नाम से जानल जाला|

कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स, नाइट्रस ऑक्साइड आ ओजोन आदि मुख्य हरित गृह गैस कहाला| मूल रूप से पृथ्वी के औसत तापमान पंद्रह डिग्री के आस पास ह| लेकिन हरित गृह प्रभाव के चलते ओकरा से लगभग तेतीस डिग्री अधिक तापमान बा जवन कि एगो घोर चिंता के विषय बा| इ दिनों दिन बढ़ल चल जाता| शायद इहे कारन बा कि पर्यावरण से जुडल प्रसिद्ध वैज्ञानिक लोग अपना रिपोर्ट (डब्लू. डब्लू. ऍफ़.) में 50 साल के भीतर दुनिया के उजड़ जाए के आशंका जता रहल बा|

कुछ दशक से वैश्विक स्तर पर एह समस्या से निपटे खातिर एगो सम्मलेन के आयोजित कईल जा रहल बा, जहाँ पूरा विश्व जलवायु में आवत अनियमितता के कईसे कम कईल जाव एह प गंभीर मंथन कर रहल बा| लगभग 200 देश आसपास मिलके ‘कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टी’ के गठन कईले बा, जवना के लगले हाल में COP21 के आयोजन फ्रांस में कईल गईल ह| अंतराष्ट्रीय स्तर के ढेर नेता लोग बरियार भाषणबाजी कईले ह जा लेकिन ग्राउंड लेवल प एकर काम कवनो खास नइखे| एकरा पीछे कारण बा अंतराष्ट्रीय राजनीती जवन विकसित देश अउरी विकासशील देश के बीच होखत आइल बा कार्बन उत्सर्जन के लेके|

एकर एगो बढ़िया पहल देखे के मिलल दिल्ली में जहवाँ ओहिजा के मुख्यमंत्री एगो नया फार्मूला टेस्ट कर रहल बाड़े इवन आ ओड के जवन कि काफी सराहनीय बा| अगर एकरा खातिर कुछ सरकार के तरफ से कुछ धन भी लागत होखे आ ओहिजा सफल होखत नजर आवत होखे त इ दिल्ली सरकार के एगो बरियार सफलता कहाई| काहे कि अगर एह प ध्यान ना दिआई त उ दिन दूर नईखे जब ओही सड़क प कवनो टैक्सी आ कैब के जगह नाव चलत मिले लागी|

डब्ल्यू-डब्ल्य.एफ. के एगो रिपोर्ट

पर्यावरण से जुड़ल दुनिया के सबसे मशहूर संस्था वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ) के एगो रिपोर्ट में इ कहल गईल बा कि महज आवे वाला अगिला पचास साल के भीतर पूरा दुनिया उजड़ जाई| ओहिजा के वैज्ञानिक लोग एह बात के चेतावनी देले बा कि जवना रफ़्तार से अंधाधुन संसाधन के शोषण हो रहल बा आ विकास के अँधादौड़ चालू बा ओकरा हिसाब से 2050 आवत आवत आबादी के जरूरत पूरा करे खातिर कम से कम दुगो अउरी ग्रह प कब्ज़ा के करे के आवश्यकता पड़ सकेला| संसाधन के दोहन अगर इहे रफ़्तार से रहल त समुद्रन के मछली गायब हो सकेलिसन अउरी कार्बनडाइऑक्साइड के सुखावे वाला सारा जंगल उजड़ जाई|

एकरा बाद शुद्ध पानी खातिर भयंकर संकट छा जाई| एह रिपोर्ट के वैज्ञानिक साफ़ साफ़ चेतावनी दे रहल बाड़े कि या त आपन जीवन शैली बदल लीं ना त दुगो अउरी ग्रह खीज ली| एह रिपोर्ट के भी संज्ञान में नइखे लेवल जात| अगर लेवल गईल रहित त सारा देश खाली आश्वासन ना दित बल्कि जमीनी स्तर प आके एकरा खातिर कुछ करीत भी| लेकिन आज सारा देश कूटनीति में अझुरा के रह गईल बा आ अर्थव्यस्था के स्तिथि के हवाला देके सारा समस्या अझुरईले बा| तापमान बढे से गैलेसिएर पिघल रहल बा, समुद्री जल स्तर बढ़ रहल बा| तबाही के संकेत लगातार वैज्ञानिक लोग दे रहल बा|

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एह रिपोर्ट में वैज्ञानिक लोग उत्तरी अटलांटिक सागर के उदाहरण देत बतावत बाड़े कि सन् 1970 में अहिजा काड मछली के करीब 2 लाख 64 हजार टन भंडार रहे, जवन कि सन् 1995 में घटके 60 हजार टन ही रह गईल बा| सन् 1970 से 2002 के बीच पृथ्वी के अपेक्षाकृत  जंगल के प्रतिशत लगभग 12 फीसदी कम हो गईल बा| ताजा पानी के भंडार 55 फीसदी घट चुकल बा अउरी समुद्री जीवन भी घटके एक-तिहाई ही रह गईल बा| इ सारा तथ्य एगो खतरनाक भविष्य दने इशारा कर रहल बा, जवना से अभी तक त दुनिया अनजान ही नजर आइल बा, डब्ल्यू. डब्ल्यू.एफ के अनुसार खतरा मनुष्यन खातिर ही ना, बल्कि 350 तरह के स्तनधारियों, पक्षियों, मछलियों आदि खातिर बा|

एह में से कइगो प्रजातिन के संख्या पिछिल्का 30 साल में ही आधा से अधिक घट चुकल बा| एह रिपोर्ट में अमेरिका के सबसे अधिक लताड़ल  गईल बा अउरी कहल गईल बा कि अमेरिका के एगो औसत नागरिक ब्रिटेन के नागरिक के  तुलना में संसाधन के दू गुना अउरी कईगो एशियाई अउरी अफ्रीकन नागरिक के तुलना में 24 गुना अधिक खर्च करेला| एह रिपोर्ट में अनाज, मछली, लकड़ी अउरी ताजा पानी के खर्च आ उद्योग अउरी वाहन द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के आधार प हर देश खातिर एगो आंकड़ा (फुटप्रिंट) तइयार कईल गईल बा जवन इ बतावत बा कि देश-विदेश के एगो व्यक्ति के रहे खातिर औसतन कतना जमीन उपयोग करे के चाही|

पर्यावरण से छेड़छाड़ प्राकृतिक आपदा के दावत

पर्यावरण से छेड़छाड़ अपना आप में प्राकृतिक आपदा के दावत देवे के समान बा| एकरा के चेन्नई में आइल बाढ़ के केस स्टडी से समझल जा सकत बा| पुराना जमाना में कुआँ, तलाब जईसन चीज के राजा लोग बहूत प्राथमिकता देत रहे लेकिन आज के राजा विकास के अँधा दौड़ अउरी तात्कालिक परिवर्तन के चक्कर में पर्यावरण के बहूत हल्का में ले रहल बा| तमिलनाडु के राजधानी, चेन्नई में जवन एअरपोर्ट बनल बा उ एयरपोर्ड अडियार नदी के फ्लड बेसिन प बनल बा| जब भी अडियार नदी में बाढ़ आई तब तब चेन्नई के एअरपोर्ट प्रभावित होई| 50 साल के बाद अतना तेज बुनी परल बा एह से बाढ़ आइल ह, इ कुल चीज एगो राजनितिक बहाना ह|

काहे 50 साल पाहिले जब एकरो ले तेज बुनी परत रहे तबो त चेन्नई ओहिजे रहे| कारन इ नइखे कि बुनी कम परल कि ज्यादा| मुख्य कारन इ बा कि जवना हिसाब से तलाब, कुआँ अउरी झील-झरना के अतिक्रमण भईल बा, अइसन आपदा ओही कुल अतिक्रमण के फल ह| तबाही कवनो ऊपर से ना आवेला बल्कि हमनिए के तबाही के कारण बनीलाजा| हमनी के सारा फोकस राहत आ बचाव कार्य के किस्सा आ कहानी प टिक के रह जाला| ओकरा बाद सबकुछ सामान्य हो जाला आ सरकार के भी पीछा छुडावे के एगो बढ़िया मौका मिल जाला|

मद्रास प्रेसीड़ेंसी अंग्रेजन के समय के एगो प्रशासनिक इकाई रहे| ओह इकाई में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, केरल और कर्नाटक का कुछ हिस्सा मद्रास प्रेसिडेंसी में आवत रहे| अंग्रेजन के समय तक मद्रास प्रेसीड़ेंसी में लगभग 53000 तलाब रहे| ओहिजा सन 1985 में सिर्फ 14 जिला में 43000 तलाबन प काम चलत रहे| अब रुए सोचीं कि का ओतना तलाब आजो बा? अगर रहित नु त जतना बुनी परल बा ओकरा दुगनो होईत ह शायद तलाब झेल के सभे के सुरक्षित रख लिहित| जब अपना सिक्यूरिटी गार्ड के रुआ खुद मार देनी जवन हमेशा रक्षा करत आइल बा, तब अगर आवे वाला समय में कवनो प्राकृतिक हमला होखत बा त खुद निपटी|

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भले एगो छोट समय खातिर तलाब के अतिक्रमण करके बिल्डिंग आ कवनो संस्था बनावे से लाभ भईल होखे लेकिन एह तरह के प्राकृतिक आपदा ओकरो से ज्यादा के नुकसान पहुचावेला| कतना लोग के वर्षो के कमाई सब बह गईल| खासतौर प मिडिल क्लास के परिवार जवन ओसहू अपना विकास के लेके सैंडविच बनल रहेला उ अइसन आपदा के कवना तरीका से झेलले होई| पलायन करके आइल मर-मजदूर के संघे कवन कवन चुनौती आइल होई जेकर घर हर महिना के आवेवाला पईसा के इतजार में रहेला| एह सब चीज के सीधा सरोकार भारत के अर्थव्यवस्था से बा, चाहे केंद्र सरकार द्वारा देवल पैकेज होखे आ चाहे लोग के पुनः विस्थापित होखे खातिर भारत सरकार के प्रयास होखे|

आज के दू साल पाहिले चेन्नई लेखा दिल्ली में भी भईल रहे| दिल्ली के इंदिरा गाँधी हवाई अड्डा भी मानसून से डूब गईल रहे| यात्री लोग घुटना भर पानी में चलत रहे ओह घरी| दिल्ली के भी ठीक उहे कहानी बा| जवना जगह प अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा बा ओहिजा बड़े बड़े तलाब होत रहे| भारत के राजधानी दिल्ली में 1997-98 के आंकडा के हिसाब से 355 तालाब रहे अउरी 44 झीलें रहे| इंटैक नाम के संस्था जब झील के लेके सर्वे कईलस त पता चला कि पंद्रह साल में आधा से ज़्यादा झील ग़ायब हो चुकल बिया| एह सब प बिल्डर लोग सरकार के अनुमति से मकान बना लेले बा| मकान के कीमत बढ़त गईल त लोग तालाब तक भर डालल|

ओकरे नतीजा आज लोग बाढ़ के रूप में भुगत रहल बा| इहे ना बल्कि नगरीकरण, औद्योगीकरण, कोयला प आधारित विद्युत तापगृह, तकनीकी तथा परिवहन क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन, कोयला खनन, मानव जीवन के रहन-सहन में परिवर्तन, उदहारण के रूप में, जीवनशैली के कारण रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीश्नर आ परफ्यूम के एगो बड पैमाने प उपयोग होखल, धान के खेती के क्षेत्रफल में अभूतपूर्व विस्तार, आधुनिक कृषि में रासायनिक खादन के अंधाधुंध प्रयोग आदि कुछ अइसन प्रमुख कारण बा जवन हरित गृह गैसन के वातावरण में उत्सर्जन खातिर उत्तरदायी बा|

अलग अलग क्षेत्र में एकर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारन सबसे भयंकर रूप से पर्यावरण के क्षति होई| जलवायु परिवर्तन के कारण बंगाल के खाड़ी में जल स्तर में वृद्धि होई, जवना के परिणामस्वरुप कारण अण्डमान तथा निकोबार द्वीप समूह भी जल में डूब जाई, जवना से जैव-विविधता के एगो बड पैमाने पर क्षति होई| जलवायु परिवर्तन के कारण कीट, खरपतवार आ रोगाणु के जनसंख्या बढ़ी जवना के नियन्त्रण खातिर एगो बड पैमाना प Pesticides के प्रयोग के कारण पर्यावरण प्रदूषित होई| कीटनाशक आ शाकनाशक के अंधाधुंध प्रयोग से उपयोगी कीट, फसल के जंगली प्रजाति अउरी पौधन के अन्य उपयोगी प्रजाति भी प्रभावित होइ, जिवना से जैव-विविधता के क्षति पहुची|

अगर कृषि क्षेत्र के बात कईल जाव त जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप मुख्य फसल जइसे गेहूँ तथा धान के पैदावार में बरियार कमी आई| फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी खातिर कीटनाशक प निर्भरता बढ़ी, जवन कि इहो अपना आप में पर्यावरण खातिर काफी नुकसानदेह बा| जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभाव वर्षा के वितरण प भी पड़ेला| उत्तरी आ मध्य भारत में कम वर्षा होइ जबकि एकरा ठीक उल्टा देश के पूर्वोतर आ दक्षिण-पश्चिमी राज्यन में अधिक वर्षा होइ जवना के परिणामस्वरुप वर्षा जल की कमी से उत्तरी आ मध्य भारत में लगभग सूखा जईसन स्थिति होइ जबकि देश के पूर्वोत्तर आ दक्षिण पश्चिमी राज्यन में अधिक वर्षा के कारण बाढ़ जईसन समस्या पैदा हो सकेला| दुनो ही स्थिति में फसल के पैदावार प्रभावित होई|

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जलवायु परिवर्तन के सामाजिक आ आर्थिक प्रभाव भी काफी व्यापक हो सकेला| कृषि के क्षेत्र में कीटनाशक अउरी रासायनिक उर्वरता प निर्भरता के कारन आमिर आदमी अउरी आमिर होत चलल चल जाई आ गरीब आदमी अउरी गरीब| कृषि क्षेत्र में हानि के वजह से ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहरी क्षेत्र में पलायन करे लगिहे जवन कि पहिलही भीड़ भाड़ से बुरी तरह ग्रसित बा| जहवाँ संसाधन के अंधाधुंन उपयोग कईल जाला| ग्रामीण क्षेत्र के संयुक्त परिवार एकल परिवार में बदले शुरू हो जाई| तपन के कारण वन में आग लागे के घटना में वृद्धि के परिणामस्वरूप वन में रहे वाला जनजाति विस्थापित होखे लागी|

चूंकि जनजाति के पहचान ओह लोग के संस्कृति, रहन-सहन आ खान-पान, पहनावा-ओढावा से होला| एह लोग के मुख्य जीवनधारा में अइला के बाद ओह लोग में बदलाव आई जवना से ओह लोग के पहचान अपना मने समाप्त हो जाइ| जलवायु परिवर्तन के फलस्वरुप कीटन आ रोगाणु के जनसंख्या में बढ़ोत्तरी के कारण फसल उत्पादन प विपरीत प्रभाव पड़ी जवना से आर्थिक तंगी आ ऋण बोझ के कारण किसानन के आत्महत्या खातिर मजबूर होखे के पड़ी| खासतौर से, देश के महाराष्ट्र, कर्नाटक अउरी तेलंगाना जइसन  राज्यन में किसानन के आत्महत्या के दर में कई गुना वृद्धि होखल बा|

जलवायु परिवर्तन होखला के चलते भारत जइसन कृषि प्रधान देश में एकर सीधा प्रभाव आर्थिक जगत पर पड़ी| जलवायु परिवर्तन के कारण वाष्पीकरण आ पौधन में वाष्पोत्सर्जन के दर में भी बरियार वृद्धि होई जवना के परिणामस्वरुप जलस्रोत आ मिट्टी में पानी के कमी आवल लाजमी बा| जल के कमी के कारण फसल उत्पादन प विपरीत प्रभाव पड़े के आशंका हमेशा बनल रहेला| फसल के पैदावार में गिरावट के कारण देश के अर्थव्यवस्था प प्रतिकूल प्रभाव पड़ी जवना से मुद्रास्फिति के दर बढ़ी| मुद्रास्फिति के दर बढे के कारण गरीबी आ भूखमरी के साथे साथे बेरोजगारी भी पड़ी|

गरीबी के कारण बालश्रम अउरी वेश्यावृत्ति सहित अन्य अपराधन में बेजोड़ वृद्धि होखी जवन देश की कानून व्यवस्था खातिर गंभीर चुनौती रहल बा| गरीबी में वृद्धि के कारण माओवाद आ नक्सलवाद जइसन समस्याओं में भारी वृद्धि होखे के आशंका भी रहेला| मुद्रास्फीति बढे के कारण उद्योग जगत भी काफी हद तक प्रभावित होखी| कृषि प आधारित उद्योगन में उत्पादन के बरियार कमी के कारण उद्योग बंद होखे के सम्भावना भी बनेला| एकर परिणामस्वरुप बेरोजगारी के समस्या पैदा शुरू होखे लागी| ग्रामीण क्षेत्रन के साथे-साथे शहरी क्षेत्रन में भी आत्महत्या के घटना में विशाल सम्भावना बनल रहेला|

अंत में निष्कर्ष के रूप में हम इहे कहल चाहब कि जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष आ अप्रत्यक्ष प्रभाव देश के कृषि, पर्यावरण, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सामाजिक, आर्थिक, संसाधन पर्यटन, राजनैतिक अउरी आंतरिक सुरक्षा आ सामरिक क्षेत्रन प निश्चित रूप से पड़ेला| जलवायु परिवर्तन के फलस्वरुप देश के कृषि उत्पादन में कमी आवल लाजमी चीज बा| खाद्यान्न उत्पादन में कमी के कारण मुद्रास्फिति के बढ़ल आम बात बा| एकरा परिणामस्वरुप गरीबी अउरी बेरोजगारी में बढ़ोत्तरी होई जवन देश में अपराध वृद्धि के कारण बन सकेला| एह से एह समस्या से लडे अउरी निजात पावे खातिर सब आदमी के योगदान के जरूरत बा|

नोट:- हमार इ लेख ‘हेल्लो भोजपुरी’ के जनवरी अंक में छप चुकल बा|

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