भारत अउरी भारत के अलावां अउर देशन के सांप्रदायिक समीकरण (भोजपुरी)

जतना भी सार्क देश बाड़ीसन वोह सभ में भारत हर चीज में आगे बा चाहे आकार के बात होखे, चाहे जनसँख्या होखे, चाहे GDP (सकल घरेलु उत्पाद) के नजरिया से, एकर अलावां एगो अउरी खास बात बा जवन कि एगो लोकतान्त्रिक देश के नाते मह्त्वपूर्ण भी बा, भारत वोह सभ दक्षिण एशिया देश में अकेला देश बा जवना के पहचान कौनो धर्म से नइखे जुडल, खैर लोग लागल बा लेकिन सम्भावना बड़ा कम बा.

सबसे पाहिले बौध धर्म के बात कईल जाव त इ श्रीलंका अउरी भूटान के अधिकारिक रूप से राष्ट्रीय धर्म ह. ओकर अलावां पाकिस्तान भी इस्लामिक देश असही सुन्नी इस्लाम मालदीव के अधिकारिक धर्म हवे. अब देखि एहिजे एके धर्म के दुगो धर्म बटा गईल माने सिया हासिए प बा मुस्लमान होते हुए भी. असही अगर कभी भारत भी हिन्दू राष्ट्र बनी त अइसन दिन आवे के संभावना बा जवना जब एगो जाती विशेष आपन हिन्दू धर्म के अधिकारिक रूप से राष्ट्रीय धर्म कहलावे के हर कदम प्रयास करी ठीक ओइसही जईसे सुन्नी, शिया के ऊपर डोमिनेंट बा.

बांग्लादेश जब पाकिस्तान के साथ रहे तब उहो इस्लामिके में गिनात रहे लेकिन 1971 में अलगा भईला प ईगो धर्मनिरपेक्ष देश बनल. भारत कवनो धर्मविशेष से अपना के नइखे जोडले फिर कथनी अउरी करनी में जमीन आसमान में अंतर बा. हम नेट प सर्च करत रही आजादी के बाद के दंगा के बारे में तब दू तिन गो बात नोट कईली.

धर्मनिरपेक्ष संविधान के बावजूद बहुसंख्यक समाज अल्पसंख्यक प हावी रहल बा चाहे कश्मीर घाटी के बहिसंख्यक मुस्लमान होखस या बाकी के हिस्सा के बहुसंख्यक हिन्दू. 1950 के दशक में धर्मनिरपेक्षता के सद्भाव बनल रहे आपसी मेल भी कुछ ठीके ठाक रहे दंगा के नजर से, राजनितिक ना, काहे कि राजनितिक भूचाल खूब भईल रहे जवना के परिणाम आगे देखे के मिलल. 

धर्मनिरपेक्षता के वर्त टूटल जबलपुर के बड दंगा से फिर ओकरा बाद जवन शुरू भईल कि आजो साँस लेवे से बाज नइखे आवत. 1960 अउरी 1970के दशक में उत्तरप्रदेश,महाराष्ट्र,बिहार,गुजरात जइसन देश में खचाखच दंगा भैलिसन. 1984 के घटना सबके पते बा दिल्ली में जवन भईल रहे सिख दंगा ओकरा बाद 1990 के दशक में इस्लामिक कट्टरपंथी कश्मीर घाटी से हिन्दू नागरिक के खदेड़लस बड पैमाना प.

ओकरा बाद रामजन्मभूमि फिर गोदरा कांड जेकर प्रभाव मुंबई में भी देखे के मिलल ओपर एगो फिल्मो बनल बा “ब्लैक फ्राइडे”. इ सब इतना आसानी से बदले वाला नइखे. दक्षिणपंथ के प्रभाव के भारतीय राजनीती के शक्ल सूरत भी बदल गईल बा ओकरे चलते अल्पसंख्यक के प्रति रवैया भी अलगे बा, लेकिन पाकिस्तान और बाकी के देश के अपेक्षाकृत काफी बेहतर बा.

भारत में त सत्ता अउरी धर्म में काफी दूरी आज भी बा. लेकिन पाकिस्तान में आज भी इस्लानुमा ढांचा मेन्टेन रखे खातिर शरिया कानून के प्रभाव देखल जा सकेला. खासकर जिया उल हक के दौर में काफी बड पैमाना प इस्लामीकरण भईल रहे. अहमदिया संप्रदाय के लोग गैर इस्लामिक घोषित कईल गईल रहे. सच पूछी त आज भी पाकिस्तान के काफी सूती मिल कई कारन से बंद बा. आज भी पाहिले लेखा पश्चिमी एशिया और कुछ पश्चिमी देशन से मिले वाला पईसा के बदौलत मदरसा फले फुलेला, जवान वहाबी विचारधारा के मूल रूप से शिक्षा देला. सुन्नी उग्रवादी सबसे पाहिले हिन्दू अउरी इसाई के निशाना बनैले रहसन.

तादाद कम हॉट गईल अउरी आसानी से दबत गईल ओकरा बाद आइल नंबर शिया के, खैर शिया राजनितिक अउरी व्यव्शायिक प्रभुत्व लोग में रहे लोग काहे कि याद करी आजादी के वक्त मुस्लमान के मसीहा जिन्ना भी खुद शिया रहन. गत कई साल से शिया के धार्मिक स्थल औरी आबादी प् कई बेर हमला भईल. बंगलादेश भी धर्मनिरपेक्षता प बहूत गर्व करत रहे यहाँ तक कि आपण राष्ट्रगान भी रविन्द्रनाथ टैगोर से लिखावावल बा.

लेकिन फिर आजादी के चार दशक बाद से इस्लामीकरण के प्रक्रिया रुकल ना काहे कि आज भी बांग्लादेश के हिन्दू के शरणार्थी होखे के मजबूर बा और पलायन प्रक्रिया निरंतर बढ़त गईल बा. बात कईल जाव श्रीलंका के त वोहिजा राजनितिक संघर्ष के केंद्र धर्म ना भाषा रहे. दक्षिण में सिघली बहुसंख्यक, उत्तर के तमिल अल्पसंख्यक के तरक्की से बहूत डेराईल रहे लोग. सिंहली भाषा के एकमात्र राष्ट्रभाषा बना देवल गईल.

हद त तब भईल जब बौध के राष्ट्रधर्म बना के वोहिजा रहे वाला अल्पसंख्यक तमिल हिन्दू, इसाई अउरी मुस्लमान के मुह प जोरदार झापड़ मारल गईल. भाषाई वर्चस्व के भरपूर साथ देलस धार्मिक बर्चस्व दूसरका बात इ कि ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ भी उदार कहाँ रहे काहे कि एक दिन जाफना(श्रीलंका के शहर अउरी LTTE के गढ़) के कहानी हम राज्य सभा टीवी पर देखत रही त पवनी कि जाफना जइसन कई गो शहर में मुस्लमान आवाम अउरी धर्मस्थल प हमला कईल गईल रहे LTTE द्वारा.

भूटान में भी अइसने समीकरण रहे 90 के दशक में आपन बौध पहचान के मजबूत करे खातिर निरंतर हिन्दू परिवार के नेपाल में ढकेले के प्रयास कईलस. जबकि 19वी शताब्दी के शुरुआत में नेपाल एगो हिन्दू राष्ट्र रहे. खैर अब काफी कुछ बदल गईल बा. आजादी के समय खाली श्रीलंका अउरी भारत एगो लोकतांत्रिक रहे बाद में पाकिस्तान,श्रीलंका अउरी नेपाल भईल. अब भूटान में भी चुनावी प्रक्रिया होखे लागल बा एहसे इहो गते गते लोकतांत्रिक शक्ल लेवे लागल बा.

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