कश्मीर के इ व्यथा सुने वाला के बा ? (भोजपुरी)

कश्मीर के पर्वतराज हिमालय के मुकुट आ भारतमाता के सौन्दर्यपूर्ण मुख के रूप में जानल जाला| पिछिला बितल कुछ दशक से एह मुख आ मुकुट प दर्द के रेखा गहिरा गईल बा| आए दिन ऋषि कश्यप के साधना वाला धरती खून से लाल होला| कश्मीर में एह खून बहला के चलते लोर के नदी भी बहेला| लोर ना त सुखाए के नाम लेत बा आ नाही एकर धार कम होखे के नाम लेत बा| झेलम नदी के तट प बसल एह खुबसूरत भू-भाग के तीन गो इलाका बा| जम्मू, कश्मीर अउरी लद्दाख|

पकिस्तान के कब्ज़ा वाला इलाका में दुगो अउरी खंड बा- शुमाली इलाका अउरी पकिस्तान के कब्ज़ा वाला कश्मीर| चीन के कब्ज़ा में लद्दाख के अक्साई चीन इलाका आवेला| भारतीय कश्मीर घाटी में मूल रूप से छव गो जिला बा जवना के नाम रउरा सभे हमेशा न्यूज़ चैनल आ अखबार में देखले होखब जा| श्रीनगर, बड़गाम, अंनंतनाग, पुलवामा, बारामुला अउरी कुपवाड़ा| कश्मीर हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र ह| पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला जम्मू खंड अउरी पकिस्तान से अलग करेला| डल, वुलर अउरी नागिन झील से सजल एह भारतभूमि में सबकुछ अच्छा नइखे चलत|

पौराणिक कथान के अनुसार एहिजा प्रजापति दक्ष के पुत्री आ भगवान शिव के पुत्री माता सीता रहत रही| ओह घरी घाटी पानी से भरल रहत रहे| ओहिजा राक्षसनाग देवी-देवतान लोग के संकट में डाल देले रहे| देवन के प्राथनान से ओह लोग के माता सती भगा देले रही| एह घाटी के पानी के वितस्ता अउरी झेलम में बहा देली| तब से इ स्थान सतीसर से कश्मीर हो गईल| कश्मीर के पुरान इतिहास के लमहर कालखंड में एहिजा मौर्य, कुषाण, हुण, मुग़ल, अफगान, सिख अउरी डोगरा राजाओं का राज्य रहा| मौर्य सम्राट अशोक अउरी कुषाण सम्राट कनिष्क के समय कश्मीर, बौध धर्म आ संस्कृति के मुख्य केंद्र बनल|

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य अपना समय एहिजा फिर से सनातन धर्म के झंडा गडले| ओकरा बाद चक्रवर्ती सम्राट ललितादित्य आपन एगो बरियार सम्राट के स्थापना कईले| उनका समय कश्मीर सनातन धर्म आ संस्कृति विद्या के बरियार केंद्र बनल| कश्मीर दर्शन अउरी विद्या के साधना खातिर एगो जानल पहचानल जगह रहल बा| एकर प्रणाम भी रहल बा| इहाँ तक कि गिलगिट में मिलल पाण्डुलिपिन बाड़ीसन ओहमे बौध धर्म के अभिलेख मिलल बा| प्राचीन पाली भाषा में लिखल पाण्डुलिपि से सहिष्णुता के दर्शन होला|

इ सब ओही कश्मीर में बात हो रहल जवन आज आतंकवाद के पर्याय बन चुकल बा| इ एगो महज विवंडना ही कहल जा सकेला कि स्वतंत्र भारत के पहिला प्रधानमंत्री खुद कश्मीरी पंडित रहले लेकीन कश्मीरी पंडितन के अनदेखा कईले| पूरा देश के एकीकरण कईले लेकिन कश्मीर उनका से अछूता रह गईल| आजादी के बाद जब पाकिस्तानी सेना के साथे कबायली कश्मीर के मुज्जफराबाद में घुसलेसन तब महाराजा हरी सिंह आ उनकर प्रधानमंत्री मेहरचन्द्र महाजन बार-बार सहायता खातिर भारत सरकार से गुहार लगावत रहले लेकिन कोई ना सुनल|

इतिहास में एहिजा लार्ड माउंट बेटेन के भी दोषी मानल जाला| वी.पी. मेनन आपन किताब में एह घटना के जिक्र भी कईले बाड़े आ कहले कि माउंटबेटेन के कहनाम रहे कि कश्मीर के राजा हरी सिंह जब तक से ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेसन’ प हस्ताक्षर ना करिहे तब तक भारत आपन फ़ौज ना भेज सके| सवाल इहो बा कि जब भारत ना भेज सके तब पकिस्तान के भी ना भेजे के चाहत रहे नु? पकिस्तान भी त ओह कागज़ प हस्ताक्षर ना नु करवईले रहे| लेकिन एह सवाल के जवाब आजो रहस्य बनल बा|

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एही से स्वतंत्र भारत के पहिला प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु से इतिहास आजो सवाल करेला कि जहाँ से आवत रहले ओकरा के काहे ना बचवले| जब हैदराबाद बच सकत रहे तब कश्मीर काहे ना? उहे पाकिस्तानी सेना सबसे पाहिले कश्मीरी पंडितन के व्यापक हत्या कईलस| कश्मीर के ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह बिना वर्दी के अढाई सौ जवानन के साथे रोके के भरपूर कोशिश कईले| लेकिन सब लोग मारल गईल| राजेन्द्र सिंह ओने से आवे वाला एकमात्र पुल के ध्वस्त करके कम से कम दू दिन तक पाकिस्तानी कबायलिन के रोक के रखले रहले बस एह आस में में कि शायद अबो ले समिति फ़ौज भेज के कश्मीर के बचा लेवे| सुरक्षा समिति के बैठक त भईल लेकिन कश्मीर के सहायता देवे से इनकार कर देवल गईल| तब जाके सरदार बल्लभ भाई पटेल महराजा हरी सिंह आ मेहरचन्द्र महाजन से बात करके ओह दस्तावेज में हस्ताक्षर करवईले| जईसे ही ओह दस्तावेज प हस्ताक्षर भईल ओसही हवाई जहाज के माध्यम से भारतीय फ़ौज के कश्मीर में भेजल गईल|

जब भारत के सेना लागातार पाकिस्तान प हमला करके विजय पावत रहे आ कबायली खदेडल जात रहन तबे स्वतंत्र भारत के पहिला प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु युद्ध विराम में घोषणा कर दिहले| एह घोषणा से मुजफ्फराबाद, पुंछ, मीरपुर आ गिलगिट के क्षेत्र पकिस्तान में चल गईल| युद्ध विराम के इ फैसला भी बहुत सारा प्रश्न के जन्म देला आ नेहरु जी सामने ठाडा होके आखी में आँख डाली के सवाल करेला कि जब दस्तावेज प हस्ताक्षर हो गईल रहे बाकी के तमाम राज्यन लेखा तब काहे आपन घर के समस्या के दुनिया के समस्या बनावल गईल आ मामला के संयुक्त राष्ट्र में ले जावल गईल| माउन्टबेटेंन के रुख एहिजा काहे बदलल? जब कबायली हमला कईले रहे त इहे कह के नु भारत के फ़ौज ना भेजल जात रहे कि बाकी के राज्यन लेखा उ लोग दस्तावेज प हस्ताक्षर नइखे कईले| जब इ काम करवा भी देहल गईल तब माउंटबेटेन काहे बीच में हस्तक्षेप कईले| पंडित जवाहरलाल नेहरु काहे ना रोकले?

डॉ भीम राव आंबेडकर अउरी न्यायमूर्ति डी.डी. बसु के विरोध के बावजूद काहे धरा 370 लागल, जवन अठइ अस चिपकल बा| एह में कहल गईल कि भारत के कवनो कानून तब तक के कश्मीर में लागू ना होई जब तक ओहिजा के विधानसभा में पारित ना हो जाव| एही तरह भारत में दू गो संविधान, दू प्रधान आ दू निशान के मान्यता मिलल| एकरा विरोध में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रव्यापी आंदोलन कईले| तब उनका के जेल में डाल देवल गईल आ उनकर हत्या भी कर देवल गईल|

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ओकरा बाद से ओही कश्मीर खातिर भारत पकिस्तान में युद्ध के शुरुआत भईल| पकिस्तान के संघे तीन गो बड युद्ध भईल पहिला 1947 में, दूसरा 1965 में आ तीसरा 1971| सबसे बड बात इ कि शुरुआत पकिस्तान कईलस आ बुरी तरह से हार के भी गईले जा| जब जब असफलता मिलल तब तब आतंकवाद के सहारा लेले जा| उ सब आतंकवादी संगठन कश्मीरी पंडितन प दबाव बनइलस कि भारत सरकार के खिलाफ विरोह करस| जब विद्रोह करे से मना करले तब कश्मीरी पंडितन के नरसंघार भईल|

लाखों कश्मीरी पंडित पलायन करे के मजबूर भईले| तब से अब तक ओह लोग के जीवन तबाह ही रहल बा| ना त आजू ले सरकार सुनले बिया आ नाही मिडिया| जबकी चुनावी वादा में इ देखे के मिल सकत बा जहाँ पुनर्विस्थापन के बात कईले होखे| कुछ साल पाहिले दक्षिण एशिया के मीडिया एसोसिएशन के परामर्श प दस गो पाकिस्तानी पत्रकारन के टीम के भारतीय क्षेत्र में बिना रोक टोक बातचीत करेके आ रिसर्च करेके अवसर मिलल|

ओह में शामिल रहली पकिस्तान के अंग्रेजी समाचार पत्र ‘न्यूज़ लाइन’ के संपादक रेहाना हाकम लिखले बाड़ी कि “कश्मीरी पंडित एगो अईसन बेसहारा आ अल्पसंख्यक बिरादरी ह, जवना प जुल्म आ अत्याचार करे के दोषी जिहादी आतंकवाद के साथे-साथे पाकिस्तान, भारत अउरी जम्मू कश्मीर के सरकार तीनो शामिल बा| एह लोग के कमजोर नितिन के वजह से बसल घर के उजाड़ के बेघर बनाके शरणार्थी बना देवल गईल| एह आतंकवादी हमलान के विरुद्ध भारत सरकार कुछ ना कर पवलस जवन एगो दुर्भाग्य के बात बा|”

हमरा दुःख एह बात से बा कि हमनी देश के पत्रकारिता आपन भूमिका निभावे के असफल काहे रहल? जवन काम हमनी के देश के पत्रकारन के करे के चाहत रहल ह उ काम पकिस्तान के पत्रकार कईलस| रेहाना हाकम कश्मीरी पंडितन के दुःख अउरी तकलीफ के मानवीय पहलु के उजागर कईले बाड़ी| उहाँ के लिखले बानी कि पत्रकारन के टीम जब कश्मीर विश्वविद्यालय में बैठक में शामिल रहे तब पाकिस्तानी पत्रकार ओहिजा के प्रोफेसर से एगो सवाल पुछले कि “रउरा सभे के विश्वविद्यालय प्रसिद्ध अउरी योग्य लोगन से भरल बा|

कश्मीर विवाद के हल करे खातिर रउरा सभे आगे काहे नईखी आवत? एह प जवाब इहे मिलल कि “हमनि के आपन भूमिका एह से ना निभा पवनी जा काहे कि विश्वविद्यालयन के विभिन्न विभागन के इंचार्ज कश्मीरी पंडित लोग रहल बा| जब से आतंकवादीन द्वारा बड पैमाना प ओह लोग के हत्या कईल गईल बा तब से लगभग सारा प्रोफेसर कश्मीर छोड़ने को मजबूर हो गईल बाड़े जा| एह से हमनी के कुछ ना कर पवनी जा|”

इ बात शत प्रतिशत सत्य बा कि नब्बे के बाद से आज तक लाखों कश्मीरी पंडितन के अमानवीय कत्त्लेआम भईल बा जवना के वजह से कश्मीर बुरी तरह प्रभावित भईल बा| सामाजिक अशांति से लेके शैक्षिणिक स्तर प भी असर पडल बा| विभिन्न विभागन के उच्च पदन के सुशोभित करे वाला प्रोफेसर के पलायन कईला के वजह से जवन खालीपन आइल बा ओकरा के भर पावल बहुत मुश्किल बा| एह बात के ओह्जा के शिक्षाविद लोग भी मनले बा|

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पकिस्तान से संवर्धित आतंकी संगठन के एह षडयन्त्र हिन्दू-मुस्लिम एकता के पुरान परंपरा प बहुत बुरा असर पडल बा| एह सब के चलते जवन सामाजिक कमी पैदा भईल बा ओकरा के पूरा कईल वास्तव में एगो मुस्किल काम बा| रात में जिहादी लोग पोस्टर प इ लिख के घर के बाहर चपका देत रह्सन कि “कश्मीर छोड़ के चले जाव वर्ना मरने के लिए तैयार हो जाव”| गाँव में सुरक्षा के अभाव के चलते एक सप्ताह से अंदर कश्मीरी पंडित आपन घर छोड़ के शरणार्थी कैंप में पहुच गईल| सरकार के चाहत इ रहे कि ओह लोग के सुरक्षा दिवाव अउरी घर के अस्मिता बचाव, लेकिन शरणार्थी कैंप के व्यवस्था करके ओह लोग के मनोबल तुड देलस|

सरकार के दोष एह से मानल जाला काहे कि सुरक्षा सरकार के जिम्मेदारी ह| लेकिन उ समय अईसन रहे कि सब तहस नहस रहे| सरकार खुद तंग रहे| ओही घरी ‘बैलेंस ऑफ़ पेमेंट क्राइसिस’ जईसन आर्थिक संकट के अलावां कुछ साल पाहिले भईल राजीव गाँधी के हत्या से सामाजिक अशांति, देश में भईल बरियार ऐतिहासिक भ्रष्टाचार से देश तंग रहे| एही तंगी के कमजोरी बुझ पाकिस्तान फायदा उठावल चहलस| ईराक से कभी भारत के रिश्ता ख़राब ना रहे लेकिन अमेरिका अउरी इराक के बीचे भईल युद्ध जहाँ सद्दाम हुसैन के मारल गईले, तवना में भारत मजबूरन साथ देले रहे|

आज भी विश्लेषक लोग ओकरा के गलत फैसला मानेला| चुकी आर्थिक तंगी से निकले खातिर जवना बेल आउट के मांग भारत कईले रहे, ओकरा खातिर अमेरिका एगो शर्त रखले इ रहे कि अगर भारत अमेरिका के फाइटर प्लेन के भारत में लैंड करे आ तेल भरे खातिर इज्जाजत दिही तब दिआई| सरकार लगे भी कवनो विकल्प ना रहे| एह तरह से अप्रत्यक्ष रूप से साथ देला के वजह से जिहादीन के काम आसान हो गईल, जवना के फायदा कश्मीर में खूब उठवलसन|

इ कोई से छुपल नईखे कि भारतीय कश्मीर में आतंकवाद के आग लागावे वाला पकिस्तान ही रहल बा| शायद इहे कारण बा कि आज पूरा पकिस्तान खुद ओही आग में जल रहल बा| पकिस्तान पहिले से ही अस्थिरता के तरफ बढ़ रहल बा| ओकरा कश्मीर छोड़ बलूचिस्तान, सिंध, पख्तून आ पंजाब के संभाले के चाही| लेकिन अहंकार आ ऐठन अईसन चीज ह जवन इंसान के जानवर बना देला| पाकिस्तान से उम्मीद कईल बेमानी बा| लेकिन भारत सरकार के चाही कि विस्थापित भईल कश्मीरी पंडितन के पुनार्विस्थापित करे| खैर जवन ओह लोग के साथ बीतल बा ओकरा के भरपाई कईल त मुश्किल बा लेकिन जवन गलती भईल बा ओकरा के सुधारल जा सकत बा|

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